वन्देमातरम् – स्वर्णिम भारत थींम के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर कार्यक्रम आयोजित
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 21 बहनों का हुआ सम्मान
ग्वालियर । प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की महिला विंग (आर.ई.आर.एफ.) द्वारा माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में “वन्दे मातरम् – स्वर्णिम भारत” थीम के अंतर्गत “राजयोग, संस्कार और सतयुगी मूल्यों से राष्ट्र निर्माण” विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 21 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्वयं सिद्धा समूह की निदेशिका श्रीमती महिमा तारे, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाति जोशी, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा शर्मा, नारायणा ई-टेक्नो स्कूल की प्रिंसिपल निधि कुलकर्णी, नगर निगम से समग्र अधिकारी पूर्वी अग्रवाल, समाजसेविका पूर्णिमा अग्रवाल, समाजसेविका श्रीमती आशा सिंह, ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान से बीके महिमा बहन, बीके डॉ. गुरचरण सिंह एवं बीके प्रहलाद भाई मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके डॉ. गुरचरण सिंह ने ब्रह्माकुमारीज़ महिला विंग द्वारा देशभर में महिलाओं के सशक्तिकरण, नैतिक मूल्यों के जागरण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए किए जा रहे विविध कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ राजयोग के माध्यम से आत्मिक शक्तियों को जागृत कर सतयुगी मूल्यों को जीवन में धारण करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए महिलाओं की शक्ति, संस्कार और समाज में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की तथा महिला सशक्तिकरण को राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताया।
श्रीमती महिमा तारे ने कहा कि जब महिलाएँ आत्मविश्वास, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगता है।
डॉ. स्वाति जोशी ने कहा कि नारी में सेवा, करुणा और सहनशीलता के गुण स्वाभाविक रूप से विद्यमान होते हैं। यदि इन गुणों के साथ आध्यात्मिकता का समन्वय हो जाए तो वह समाज को स्वस्थ और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा किया जा रह कार्य सराहनीय है।
डॉ. अनुराधा शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल अधिकार प्राप्त करने का नाम नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्तियों और मूल्यों को पहचान कर उन्हें समाज के हित में उपयोग करने का नाम है।
निधि कुलकर्णी ने कहा कि बच्चों के संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होता है और इसमें माँ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि महिलाएँ सकारात्मक सोच को अपने जीवन में अपनाएँगी, तो आने वाली पीढ़ी भी संस्कारित और श्रेष्ठ बनेगी। उन्होंने आगे कहा कि सबल रहें प्रेम से रहें और एक दूसरे का साथ देते रहें।
पूर्वी अग्रवाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि महिलाएँ सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़कर नेतृत्व करें और अपने मूल्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा दें।
पूर्णिमा अग्रवाल एवं श्रीमती आशा सिंह ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा महिलाओं में आध्यात्मिक जागरूकता और संस्कारों का जो कार्य किया जा रहा है, वह समाज में शांति, सद्भावना और सकारात्मक परिवर्तन लाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान बीके महिमा बहन ने सभी को राजयोग ध्यान की सुंदर अनुभूति कराते हुए आंतरिक शांति और आत्मिक शक्तियों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए बीके प्रहलाद भाई नें कहा कि मातृ शक्ति के अनेक रूप है और हर रूप में अपार शक्ति है कभी ममता कि शीतल गंगा बन जाती है तो कभी साहस कि तेज धार भी बन जाती है। उन्होंने आगे कहा कि मातृ शक्ति को त्याग, तपस्या तथा प्रेम की मूरत के साथ साथ धैर्य की पहचान से भी जाना जाता है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की ओर से मंचासीन अतिथियों के साथ-साथ समाज में उत्कृष्ट सेवाएँ दे रही कई बहनों को स्मृति चिन्ह, श्रीफल एवं अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली प्रमुख बहनों में नेत्र आरोग्य एवं ऑक्यूलोप्लास्टी विशेषज्ञ डॉ. अनन्या अभ्यंकर जोशी, स्वयं सिद्धा समूह से मेघा चांदोरकर, प्रीती खोत, आयुषी मोघे, मंजीरी मोघे, अल्पा अग्रवाल, अनुश्री मोघे, अन्य क्षेत्र से सुमन खैमरिया, माधवी गुप्ता, छाया, आरती आयलानी, सविता तिवारी, मिथलेश तिवारी, कंचन तलरेजा सहित अन्य बहनें शामिल रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और सम्मानित महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा समाज में संस्कार, आध्यात्मिकता और सकारात्मक मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया।




