विवेकवान वही है जो ज्ञान का प्रयोग अपनी सोच और कर्मों में करता है: डॉ. बीके मृत्युंजय भाई

  • साइंटिस्ट, इंजीनियरिंग और आर्किटेक्ट विंग के चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
  • देशभर से पांच हजार से अधिक इंजीनियर्स, वैज्ञानिक, आर्किटेक्ट ने लिया भाग

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मुख्यालय शांतिवन के डायमंड हाल में चल रहे साइंटिस्ट, इंजीनियरिंग और आर्किटेक्ट विंग के चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन समापन हो गया। वहीं सोमवार को सम्मेलन में इंजीनियर डे मनाया गया। इसमें देशभर से पांच हजार से अधिक वैज्ञानिक, इंजीनियर, आर्किटेक्ट और निर्माण से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
समापन सत्र में अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि जीवन में अच्छी बातों को शेयर करना चाहिए। हम जिन बातों को शेयर करते हैं वह वापिस आती हैं। आज एआई का जमाना है। अपने आप को जानकर निगेटिव थॉट्स पर नियंत्रण करना जरूरी है। हमें जब क्रोध आता है तो सबसे पहले स्वयं का चेहरा खराब होता है। हमने स्कूल-कॉलेज में, परिवारों में और धर्मग्रंथों से बहुत शिक्षाएं ली हैं लेकिन क्रोध करके हम स्वयं का ही चेहरा बिगाड़ लेते हैं, क्या ऐसे लोगों को हम शिक्षावान, बुद्धिवान कह सकते हैं। विवेकवान वही है जो ज्ञान का प्रयोग अपने कर्मों में अपनी सोच में करते हैं और अपना जीवन दिव्य, महान बनाते हैं।
मुंबई से आए रिलायंस इंडस्ट्रीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट उल्हास शुक्ला ने कहा कि मैं बचपन से ही बहुत धार्मिक व्यक्ति हूं। कई सारे श्लोक मुझे कंठस्थ याद हैं लेकिन पिछले चार दिन में यह जो प्रोग्राम अटेंड किया है यह मेरी लाइफ में चैजिंग पाइंट साबित हुआ। यहां मैंने सीखा कि मैं आत्मा मेडिटेशन से परमात्मा से कनेक्ट कर सकते हैं। हम तो निमित्त हैं, हम से परमात्मा करा रहे हैं।
नई दिल्ली से आईं नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (एनपीसी) की डायरेक्टर डॉ. शुक्ला पाल मैत्रा ने कहा कि पहले मैं छोटी-छोटी बात पर ऑफिस और घर में मैनेजमेंट करने में तनाव में आ जाती थी। ऑफिस में वर्क लोड होने से समझ नहीं आता था कैसे मैनेज करें, लेकिन जबसे ब्रह्माकुमारीज़ के संपर्क में आई हूं और नियमित राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास शुरू किया है तो मेरा जीवन ही बदल गया है। अब काम के दौरान किसी तरह का तनाव नहीं होता है। मन शांत और स्थिर रहता है। यह सब संभव हुआ है यहां के आध्यात्मिक ज्ञान, राजयोग मेडिटेशन और ब्रह्माकुमारी भाई-बहनों के मोटिवेशन से। साइंटिस्ट विंग के अध्यक्ष बीके मोहन सिंघल भाई ने कहा कि यहां से आप सभी आध्यात्मिक ज्ञान से स्वयं को भरपूर करके जाएं और अपना जीवन आनंदमय-सुखमय बनाएं।

इन्होंने भी व्यक्त किए अपने विचार-

  • गुजरात बड़ोदरा से आए पीवी खुबालकर ने कहा कि आप अपने आप को कमिटमेंट करिए, तभी जीवन में बदलाव आएगा। यहां आप सभी ने जो सीखा है उसे अपनी लाइफ में धारण करेंगे तभी बदलाव आएगा।
  • भिलाई से आए नीको इंडस्ट्रीज के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर संग्राम के सुसिन ने कहा कि जब से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ा हूं मेरा जीवन बदल गया है। मेरा सोचने, समझने और चीजों को देखने का नजरिया बदल गया है। पहले मैं बहुत जल्दी हाइपर हो जाता है, हर छोटी-बड़ी बात पर रिएक्शन करता था लेकिन राजोयग मेडिटेशन के कोर्स से चीजें बदलती गईं।
  • मुंबई से आए रिटायर्ड सीजीएम देवेश मिश्रा, अंबाला से बीके शैली बहन, राजयोगी बीके देवेश भाई ने भी अपने विचार व्यक्त किए। दिल्ली के प्रेरक वक्ता बीके पीयूष भाई ने संचालन किया।

सम्मेलन में मनाया गया इंजीनियर डे-
सम्मेलन में सोमवार को सुबह इंजीनियर डे और विश्वकर्मा दिवस मनाया गया। इस दौरान नई दिल्ली के भारत सरकार के एनआईटी के आईटी की निदेशक संयोगिता गुरुंग ने कहा कि मैं पिछले दो साल से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ी हूं। मैंने जीवन की इंजीनियरिंग यहां आकर ही सीखी। मैं असली परिचय है कि मैं एक आत्मा हूं। मैं पहले ऑफिस में तनाव में रहकर 16-18 घंटे काम करती थी। मेरे जीवन को नया रास्ता राजयोग सीखने के बाद मिला। हमारे देश में हर वर्ष 1.5 लाख इंजीनियर पैदा हो रहे हैं लेकिन क्या हमने आत्मिक इंजीनियरिंग सीखी है, यह हमें उनको सिखाना है। आज युवाओं को आत्मिक इंजीनियरिंग भी सिखाने की जरूरत है। यहां से मेरे जीवन की एक नई यात्रा शुरू हुई है। साइंटिस्ट विंग के राष्ट्रीय संयोजक बीके भारत भूषण भाई और बीके कीर्ति भाई ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन बीके सुप्रिया बहन ने किया। इस दौरान दीप प्रज्जवलित कर विश्वकर्मा दिवस मनाया गया।

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