हमारे भारत देश की शान, शक्ति, शौर्य और गौरव है आध्यात्मिकता: राजयोगिनी बीके आशा दीदी

  • राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग का चार दिवसीय सम्मेलन का हुआ आयोजन
  • देशभर से राजनीति से जुड़े एक हजार प्रतिनिधि पहुंचे भाग लेने
  • समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता- एक स्वर्णिम युग की ओर विषय पर होगा आयोजन

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग की ओर से आनंद सरोवर परिसर में का चार दिवसीय राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता- एक स्वर्णिम युग की ओर विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से एक हजार से अधिक विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी, नेता, जनप्रतिनिधि और सदस्य भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन के स्वागत सत्र में मुख्य वक्ता ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने कहा कि यदि देश की संस्कृति को बनाकर रखा है तो उसमेें मातृशक्ति का योगदान सबसे ज्यादा है। बच्चों को शिक्षा देने वाली, बड़े होने पर पुरुष को सांत्वना, साहस देने वाली मातृशक्ति ही है। संस्कार देने वाली मां है। भारत को भी भारतमाता कहा जाता है। भारत ने कभी किसी देश पर पहले से आक्रमण या हमला नहीं किया है। इसके पीछे कारण है- आध्यात्मिकता। आध्यात्मिकता हमारे भारत देश की शान है, शक्ति है, शौर्य है और गौरव है। जब समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता होगी तो इस धरा पर स्वर्णिम युग आ जाएगा। हमारे देश में ही प्राचीन काल में आपस में सामंजस्य था, देवता निवास करते थे। आज हम पुन: उस स्वर्णिम भारत का स्वप्न देख रहे हैं। रामराज्य चाहते हैं। जहां यथा राजा-रानी तथा प्रजा हो।
नेपाल की सांसद गंगाकुमारी वेल्वासे ने कहा कि आज नेताओं को नैतिकवान, चरित्रवान बनने की जरूरत है, तभी शांति और सुशासन आएगा। इससे ही एकता, शांति और सौहार्द्र आएगा।

ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ने के बाद पूरा बदल गया जीवन-
हैदराबाद से आए पूर्व विधायक गंगाराम सौदागर ने अपने जीवन का अनुभव सुनाते हुए कहा कि पहले मैं बहुत शराब- मांस का सेवन करता था। जुआ में लाखों रुपये गंवा दिया। जीवन अंधकारमय बन गया था। मेरे सभी तरह की बुराइयां थीं लेकिन जब से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ा हूं तो जीवन पूरी तरह से बदल गया। जब पहली बार माउंट आबू आया तो यहां का दिव्य वातावरण देखकर और लोगों के चेहरे पर दिव्यता देखकर मैं सोचने पर मजबूर हो गया है आखिर इसके पीछे क्या राज है। यहां से लौटकर जब मैं घर पहुंचा तो मुझे बदला हुआ देखकर घर वाले सोचने पर मजबूर हो गए। फिर मैंने गहराई से राजयोग मेडिटेशन को समझा और अपने जीवन में अप्लाई किया। धीरे-धीरे मेरी सभी तरह की बुराइयां दूर हो गईं। अब मैं पूरी तरह से सात्विक राजयोगी जीवनशैली जी रहा हूं। अब अमृतवेला सुबह 4 बजे दिनचर्या शुरू हो जाती है।

नेता जीवन में अपनाएं राजयोग-
मैसूर सबजोन की निदेशिका बीके लक्ष्मी दीदी ने कहा कि समाज आपको आइडियल व्यक्ति बनने के लिए देख रहा है। आपको लोग फॉलो करते हैं। ऐसे में समाज की सेवा करने के लिए सबसे पहले आप सभी के अंदर मूल्यों का समावेश होना जरूरी है। राजयोग मेडिटेशन से हमारे अंदर की कमी-कमजोरियां दूर हो जाती हैं। दिल्ली की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके सपना दीदी ने सम्मेलन के बारे में जानकारी दी। मैसूर की बीके धानेश्वरी दीदी ने सभी को राजयोग मेडिटेशन से शांति की गहन अनुभूति कराई। मधुरवाणी ग्रुप के कलाकारों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

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