जनता वोट डालकर भूले नहीं, नेताओं से मांगें काम का हिसाब: विस अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

  • राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग के चार दिवसीय सम्मेलन का समापन
  • देशभर से राजनीति से जुड़े एक हजार प्रतिनिधियों ने लिया भाग
  • समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता- एक स्वर्णिम युग की ओर विषय पर चला सम्मेलन

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग द्वारा आनंद सरोवर में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ सम्मेलन का समापन हो गया। राजनेताः सेवक या शासक- आत्म-अवलोकन द्वारा श्रेष्ठ नेतृत्व विषय पर आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनता का काम है कि वह वोट डालकर भूले नहीं, नहीं तो नेता शासक ही बनेंगे, वह कभी सेवक नहीं बन पाएंगे। जनता को भी नेताओं से समय-समय पर हिसाब मांगना चाहिए कि श्रीमान् जी आपको हमने चुना, आप कैसे काम कर रहे हैं, कितना काम कर रहे हैं। जनता की सेवा के भाव से राजनीति में आएंगे तो ही जनता का भला होगा। हम खुद के लिए शासक बनें और जनता के लिए सेवक बनें। यदि हम जनता के लिए शासक रहे तो जनता हमें घर भेज देगी। रोम में जब जूलियस सीसर ने लोकतंत्र को तानाशाही में बदला तो लोगों ने उनको रवाना कर दिया। भारत में भी जब इमरजेंसी आई और जब शासक के रूप में इंदिया गांधी ने जनता के ऊपर शासक बनने की कोशिश की तो जनता ने उन्हें रवाना कर दिया। लेकिन जब-जब हमने सेवा के भाव से राजनीति में आए तो जनता ने अपने सिर पर बिठाया। यह केवल जनता का स्वभाव है। इसमें देशभर से एक हजार से अधिक विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी, नेता, जनप्रतिनिधि और सदस्यों ने भाग लिया।
विस अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में कहा गया है- सेवा परमोधर्म:। हम धीरे-धीरे इसे भूल गए हैं। वर्तमान राजनीति में जो लोग आते गए उन्होंने सोचा हम राजनीति में केवल पैसा कमाने या शासन करने के लिए आए हैं तो इस नाते यह विकृतियां बढ़ती गईं। जब जनता देखती है कि हमारे कुछ नेता विदेशी टूर कर रहे हैं, सैर-सपाटे कर रहे हैं, अय्याशी कर रहे हैं तो युवा पीढ़ी के अंदर एक विद्रोह का भाव स्वाभाविक रूप से आ जाता है। इसकी परिणीति हमने देखी चाहे नेपाल हो, श्रीलंका या बांग्लादेश हो हमें दिखाई दे रहा है। जब हम शासन में होते हैं तो जनता हमें भले सामने कुछ नहीं कहे, लेकिन वह सबकुछ समझ रही है, देख रही है। वह भाव कब उभरेगा, समय का पता नहीं होता।

हमें यह सोचना पड़ेगा कि मैं राजनीति में क्यों आया-
विस अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि हमें यह सोचना पड़ेगा कि मैं राजनीति में क्यों आया। आज राजनीति में त्याग के भाव की आवश्यकता है। मैं राजनीति में पैसा कमाने आया, कोई पद लेने आया तो उसकी दिशा अलग होगी। राजनीति में आया व्यक्ति यह सोचेगा कि मैं सेवा के उद्देश्य से आया हूं तो निश्चित रूप से उसमें कुछ बदला हुआ भाव नजर आएगा। लोकतंत्र के अंदर जनता ही सर्वोच्च रहती है, यह सिद्ध हो गया है। राम ने कभी नहीं कहा कि मुझे शासन दिया जाए। वहीं इस लोकतांत्रिक पद्धति के अंदर जब पिता दशरथ ने सबसे राय ली तो राम को राजा बनाया गया। वहीं जब वह मौका है कि राम को वनवास जाने का आदेश मिला तो उन्होंने एक मिनट भी नहीं सोचा और वह वन के लिए चले गए। यह हमारी भारतीय संस्कृति की महानता और खूबसूरती है। गुरुजी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने कहा था कि राजनेता का पहला कर्तव्य है राष्ट्र की आत्मा की रक्षा करना और राष्ट्र की आत्मा जनता ही है।

मैंने कभी राजनीति में आने का नहीं सोचा-
उन्होंने कहा कि मेरा राजनीति में आने का कभी सोच नहीं बना। मैं कैसे आया यह पता ही नहीं चला। बचपन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ मेरा जुड़ाव रहा। दस साल की उम्र से स्वयं सेवक रहा। 32 साल तक सेवा के भाव से प्रांत में युवाओं में राष्ट्र सेवा का भाव जगे इस नाते काम करता रहा। जब संगठन ने तय किया कि आपको राजनीति में जाना है तो 2003 में चुनाव लड़ा। ब्रह्माकुमारीज़ में दीदी और भैया कहा जाता है। हम जैसे वातावरण में रहते हैं वैसा हमारे ऊपर प्रभाव होता है।

नेताओं की छवि ऐसी हो कि लोग हाथ जोड़े-
राजस्थान सरकार के राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि राजनेताओं की ऐसी छवि हो कि जहां आप जाएं तो लोग आपके सामने हाथ जोड़े कि नेता हो तो ऐसा हो। राजनेताः सेवक या शासक यह विषय बहुत बड़ा है। यदि इस विषय की गहराई में चलें जाएं तो बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। आध्यात्मिकता के रूप में जीवन जीने की कला मिल जाए तो जीवन ही अलग हो जाएगा। मैं जिस मंदिर का पुजारी हूं वह बहुत बड़ा चामुंडा माता का मंदिर है और पुजारी के रूप में सेवा करता हूं। वहां हजारों लोग आस्था के साथ आते हैं, वहां मुझे लगता है कि स्वर्ग यहीं हैं। आज मैं आप लोगों के बीच बात कर रहा हूं तो मुझे लग रहा है कि स्वर्ग यहीं हैं। जहां आत्मा को शांति मिलती है तो लगता है वहीं परमात्मा का वास है। शांतिवन आने के बाद जो शांति मिलती है तो हम घर-परिवार की सारी चिंताएं ही भूल जाते हैं। जीवन और विचार पानी की तरह हैं जिसे जैसा ढालना चाहो वैसा ढल जाता है।

हमें अपने मन-बुद्धि का शासक बनना है-
मुख्य वक्ता राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग की राष्ट्रीय समन्वयक राजयोगिनी बीके उषा दीदी ने कहा कि जब हम अपनी सूक्ष्म और स्थूल इंद्रियों के शासक बन शासन करेंगे तो हमारा जीवन श्रेष्ठ और प्रभावशाली बनेगा। सबसे पहले हमें अपने मन-बुद्धि का शासक बनना है। जिसने अपने मन पर शासन करना सीख लिया वह दुनिया पर शासन करना सीख जाता है। हम मन में व्यर्थ विचारों के कारण दुखी हो जाते हैं और अनेक तरह के नकारात्मक विचार आते हैं, जिससे तनाव होता है। शिव बाबा ने हमें शिक्षा दी है कि बच्चे स्वराज्य अधिकारी बनो अर्थात अपने ऊपर राज करना सीखो। राजयोग से हम स्वयं पर राज करना सीख जाते हैं। हमारे यहां स्लोगन है- अंतर्मुखी सदा सुखी, बाहृ मुखी सदा दुखी। आत्म बल को समझकर बुद्धि के द्वारा मन पर नियंत्रण और अधिकार प्राप्त किया जा सकता है।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-

  • जालोर-सिरोही सांसद लुम्बाराम चौधरी ने कहा कि इस पवित्र स्थान में आपने चार दिन तक जो ज्ञान प्राप्त किया है उसका अपने-अपने सेवा स्थान पर जाकर प्रचार-प्रसार करें, तभी इस सम्मेलन का उद्देश्य सार्थक होगा। यहां जो ज्ञान लिया है उसे अपने जीवन में धारण करें। आपने यहां जो संस्कार प्राप्त किए हैं उसे अपने क्षेत्र में प्रसारित करें।
  • पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की जितनी महिमा करें कम हैं। संस्थान द्वारा पूरे देश-विदेश में समाज के कल्याण के लिए कार्य किया जा रहा है। यहां पर हर वर्ष अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
  • मप्र के सुसनेर विधायक भैरोंसिंह परिहार ने कहा कि मैं जब पहली बार ब्रह्माकुमारीज़ के सेवाकेंद्र पर गया तो वहां जो सीख मिली वह जीवनभर के लिए अनमोल धरोहर बन गई। इसके बाद मैं तीन दिन के लिए माउंट आबू आया और यहां से अनमोल ज्ञान लेकर गया। ब्रह्माकुमारीज़ एक ऐसी संस्था है जहां कोई आडंबर नहीं है। यहां जैसी सच्चाई कहीं नहीं मिल सकती है।
  • मप्र के कोलारस से विधायक महेंद्र राम सिंह यादव ने कहा कि नेता राजनीति की चकाचौंध में आकर जिस सेवा के उद्देश्य से राजनीति में आए हैं वह भूल जाते हैं। यदि नेता सेवा के भाव से काम करें तो आपको कभी चुनाव जीतने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। मैं देश और समाज की सेवा करने के भाव से राजनीति में आया हूं।
  • दिल्ली बदरपुर के पूर्व विधायक नारायण दत्त शर्मा ने कहा कि राजनीतिक लोगों को अध्यात्म से जरूर जुड़ना चाहिए। पहले टिकिट की लड़ाई, फिर विधायक बन जाओ तो मंत्री की लड़ाई। राजनेताओं के जीवन में जीवनभर तनाव है। जब से मैं ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़ा हूं तो मेरा जीवन बदल गया है। मन शांत हो गया है। तनावमुक्त जीवन जी रहा हूं।
– प्रभाग की उपाध्यक्ष राजयोगिनी बीके लक्ष्मी दीदी और गुरुग्राम ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मप्र से पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त राजू पाठक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन दिल्ली की राजयोगिनी बीके सपना दीदी ने किया। बीके कृष्णा भाई और कुमारी खुशी विश्वकर्मा ने गीत प्रस्तुत किया।

पूर्व सत्र….
वहीं एक दिन पूर्व के सत्र में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लाम्बा ने कहा कि मैं गर्व के साथ कह सकती हूं कि महिला सशक्तिकरण का पूरे देश ही नहीं विश्व में अकेला एकलौता कोई उदाहरण है तो ब्रह्माकुमारी संस्था है। यहां पर सही मायने में महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारे ही नहीं, बातें ही नहीं साक्षात् उदाहरण देख रही हूं। आज भी देश के कई राज्यों में बेटी को भ्रूण में ही मार डालते हैं। राजस्थान में एक समय सती प्रथा थी लेकिन लोगों ने संघर्ष किया, सोच बदली, समय बदला और आज वह प्रथा पूरी तरह से बंद है। इसी तरह आज समाज में दहेज की आग में हमारी बेटियां जल रही हैं। यह समाज की कड़वी सच्चाई है। जिसे हमें बदलना पड़ेगी। मैं 19 साल की उम्र में छात्र जीवन से राजनीति में आई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगी। मेरी जिम्मेदारी देश की आधी आबादी की है, आधी आबादी, पूरा हक।

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