ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय में प्रशासक महासम्मेलन का शुभारंभ- भारत एवं नेपाल के दो हजार से अधिक प्रशासक पहुंचे

मेडिटेशन से आती है मन और बुद्धि को नियंत्रित करने की कला: राजयोगिनी जयंती दीदी

– चार दिन तक प्रशासक, मैनेजर्स और सरकारी अधिकारी सीखेंगे मेडिटेशन और मैनेजमेंट के गुर

आबू रोड, राजस्थान। प्रभावशाली प्रशासन और माइंड मैनेजमेंट के गुर सीखने के लिए भारत सहित नेपाल से दो हजार से अधिक प्रशासक, सरकारी अधिकारी और मैनेजर्स ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय पहुंचे हैं। शांतिवन के डायमंड हाल में प्रशासक सेवा प्रभाग द्वारा चार दिवसीय प्रशासक महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

शुभारंभ सत्र में अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी जयंती दीदी ने कहा कि परमात्मा ने हमें सिखाया है कि यदि हमारा खुद पर प्रशासन होगा तो हम बाहरी प्रशासन बेहतर तरीके से कर पाएंगे। सर्वोच्च सत्ता परमात्मा से संबंध जोड़ने के बाद आत्मा सर्व शक्तियों से परिपूर्ण हो जाती है। इससे हम जो भी कार्य करते हैं उसमें निश्चित रूप से सफलता मिलती है। मेडिटेशन से मन और बुद्ध को नियंत्रित करने की कला सीख जाते हैं।  

नई दिल्ली से आईं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की संयुक्त सचिव ए. धनलक्ष्मी ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए अध्यात्म ही एकमात्र रास्ता है। प्रशासक को उसकी आन्तरिक शक्ति उसे अच्छा प्रशासक बनाने में मदद करती है। उन्हें जल्दबाजी या गुस्से में आकर कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए। प्रशासक को भावनात्मक रूप से सशक्त होना चाहिए।

मेडिटेशन से निर्णय लेने में मिलती है मदद-
मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने अपना संस्मरण सुनाते हुए बताया कि उन्हें राजयोग मेडिटेशन से विधानसभा में तनाव के क्षणों में निर्णय लेने में कैसे सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि समाज में मानवीय मूल्यों का निरन्तर हनन हो रहा है। जिसके फलस्वरूप प्रशासन में राजनीतिक, सामाजिक और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासक का आध्यात्मिक सशक्तिकरण जरूरी हो जाता है। कोई भी निर्णय करते समय शांतचित्त होकर निर्णय करें।

प्रशासन करना एक कला है-
प्रशासक सेवा प्रभाग की अध्यक्ष राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने कहा कि प्रशासन करना एक कला है। एक अच्छे प्रशासक में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और अनुशासन का होना जरूरी है। उसके अन्दर मानवता और धैर्यता भी जरूरी है। हर राज्य में लोक प्रशासन सिखाने वाली संस्थाएं हैं लेकिन इन जरूरी गुणों को धारण करने के लिए शिक्षा देने वाली कोई संस्था नहीं है। चुनौतियों और समस्याओं का सामना कर जब आप उन पर विजयी होते हैं तब अनूठा मानसिक संतोष प्राप्त होता है। राजयोग मेडिटेशन से हमें तीन बातें प्राप्त होती हैं- पहला हमें अपने निज स्वरूप की पहचान मिलती है। दूसरा हमारे संबंध सुधरने लगते हैं। मन और बुद्धि साफ होने से हमारी निर्णय क्षमता बढ़ने लगती है। इससे रचनात्मकता बढ़ती है। तीसरा कर्मयोगी जीवन बन जाता है, जिससे कर्म और योग का संतुलन करना सीख जाते हैं।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-
– बिहार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त सचिव विभूति रंजन चौधरी ने कहा कि तेजी से बदलते प्रशासनिक परिवेश में मेडिटेशन बहुत जरूरी हो गया है। मेडिटेशन से कार्यक्षमता और निर्णय क्षमता बढ़ती है। मैं पॉजीटिव रहने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ का टीवी चैनल रोजाना देखता हूं।
– अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि शांति हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। देश में सुख- शांति कायम रखना आप सबकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह आपके हाथ में है। ब्रह्माकुमारी संस्था देश में सनातन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। यह संस्थान 140 देशों में भारतीय संस्कृति का प्रसार कर रही है।
– अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि आज हमारा मन युद्ध स्थल बन गया है। जीवन में आध्यात्मिकता के समावेश और राजयोग से मन शांतिस्थल बन जाता है। ज्ञान की शक्ति से प्रशासन करना आसान हो जाता है। हमारी दादियाें ने बहुत कम पढ़ाई की थी लेकिन उन्हें कुशल प्रबंधन से आज विश्व के 140 देशों में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग मेडिटेशन को फैला दिया। यह सब संभव हो सका उनके त्याग, समर्पण, सेवाभाव और योग की शक्ति से।

ये भी रहे मौजूद-
अजमेर के डीआरएम राजीव धनखेर, ओआरसी की बीके विधात्री बहन, बीके ख्याति बहन ने भी संबोधित किया। जयपुर सबजोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके पूनम दीदी ने राजयोग से शांति की गहन अनुभूति कराई। प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके हरीश भाई ने प्रभाग की सेवाओं के बारे में बताया। संचालन कर्नाटक की बीके वीणा दीदी ने किया। आभार बीके शैलेश भाई ने माना। मधुरवाणी ग्रुप ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। नई दिल्ली की कुमारी पूजा और कुमारी प्रीति, लखनऊ की कुमारी सुरुचि ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।

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