तकनीक के साथ चलना अब ज़रूरी – महेश कुमार
डॉ. मनीष कुमार जैसल ने बताए एआई टूल्स के व्यावहारिक प्रयोग
ADIRA पहल के तहत 80 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग
ग्वालियर। बदलते समय के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) अब सिर्फ एक तकनीकी शब्द नहीं रहा, बल्कि समाज को दिशा देने वाला माध्यम बन चुका है। इसी उद्देश्य को लेकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मीडिया एवं यूथ विंग द्वारा ग्वालियर स्थित ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर एक दिवसीय विशेष एआई प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला ADIRA (एआई और डिजिटल समावेशन के लिए लचीलापन आधारित क्रिया) पहल के अंतर्गत डेटा लीड्स के सहयोग से आयोजित की गई।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि महेश कुमार (एडिटर एनआरटी, दैनिक भास्कर), मुख्य वक्ता डॉ. मनीष कुमार जैसल (विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, आईटीएम विश्वविद्यालय), ब्रह्माकुमारीज़ केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, मीडिया विंग एवं यूथ विंग ग्वालियर संयोजक बीके प्रहलाद भाई एवं श्रीमती रामदेई माता जी उपस्थित थीं।
कार्यक्रम में मीडिया शिक्षाविद् एवं प्रमाणित फैक्टशाला ट्रेनर डॉ. जैसल ने प्रतिभागियों को ChatGPT, गूगल लेंस, मेटा एआई, और परप्लेक्सिटी जैसे प्रमुख एआई टूल्स का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया और यह बताया कि इनका प्रयोग सामाजिक कार्यों, शिक्षा, मीडिया और जनजागरूकता में कैसे किया जा सकता है।
डॉ. जैसल ने कहा, “एआई केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम है। यदि हम इसे समझदारी और सकारात्मक सोच के साथ अपनाएं, तो यह हमारे सोचने, कार्य करने और संवाद स्थापित करने के तरीकों को पूरी तरह बदल सकता है।”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे दैनिक भास्कर के एडिटर एनआरटी, श्री महेश कुमार ने बताया कि हमें तकनीक से डरने की ज़रूरत नहीं, बल्कि उसे समझने और अपनाने की आवश्यकता है। तकनीकि के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना समय की मांग है और यदि हम सकारात्मक दिशा में तकनीक को अपनाते हैं, तो यह हमारे लिए वरदान बन सकती है।
यूट्यूब पर हम जो एक बार सर्च करेंगे वह बार-बार दिखेगा क्योंकि वह एक मशीन है। एआई हमारे सामने पिछले 4, 5 साल से चर्चित है लेकिन इंटरनेट का जब से उदय हुआ, तभी से सारी चीज हमारे बीच शुरू हुई थी। आप जिस दिशा में टूल्स का उपयोग करेंगे तो वह आपको उसी दिशा में ले जाएगा सकारात्मक भी हो सकता है नकारात्मक भी हो सकता है और माताओं बहनों को बताने का मकसद यह है कि आपके घर में बच्चे हैं, आपसे कहीं ज्यादा वो लोग इन चीजों का इस्तेमाल करते हैं तो उनकी जिस तरह की फील्ड है। उनकी फील्ड में कैसे टूल्स मदद कर सकते हैं। और आप लोग जो भी टूल्स इस्तेमाल करें उसे जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करें। यही इस टेक्नोलॉजी का बेटर फ्यूचर है।
ब्रह्माकुमारीज के वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक भाई बीके प्रहलाद ने कहा कि “मीडिया एवं यूथ विंग लगातार ऐसे आयोजन करती रहती है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों को जागरूक किया जा सके। युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस प्रकार की तकनीकी जानकारी देना आज बेहद आवश्यक हो गया है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी ने करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान आध्यात्मिक शिक्षा के साथ साथ व्यावहारिक, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी की शिक्षा प्रदान करती है। जिससे समाज में एक सकारात्मक वातावरण बना रहे।
कार्यशाला में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिनमें पत्रकार, समाजसेवी, छात्र, शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ, एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान के सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
इस अवसर पर डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. आकांक्षा, राजेन्द्र सिंह, संतोष बंसल, जगदीश मकरानी, सुरभि, रोशनी, प्रो. वर्मा सहित अनेकानेक लोग उपस्थित थे।
इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध किया कि यदि समाज को सही प्रशिक्षण और दिशा दी जाए, तो एआई जैसी तकनीकें जनहित और सामूहिक कल्याण का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। ब्रह्माकुमारीज संस्थान और ADIRA की यह पहल आने वाले समय में समाज के व्यापक जागरण का आधार बन सकती है।
