अनंत यात्रा पर चली गईं अध्यात्म की आद्य शक्ति अवधेश
स्मृति शेष: राजयोगिनी बीके अवधेश दीदी, निदेशिका, ब्रह्माकुमारीज़ भोपाल जोन
- जन्म: 16 अगस्त 1950
- अव्यक्त आरोहण: 19 सितंबर 2025
- मप्र एवं उप्र में 300 से अधिक सेवाकेंद्रों की रखी नींव
“रूहानी दीप बुझते नहीं,
बस लौ अनंत में समा जाती है।
सच्चे संत का जाना अंत नहीं,
वो हर हृदय में साधना बन जाती है।”
दुनिया में समय प्रति समय कुछ ऐसे दिव्य, तपस्वी, प्रतिभा संपन्न और महान व्यक्तित्व जन्म लेते हैं, जिनका जीवन चरित्र, प्रेरक कर्म, त्याग, समर्पण, अनमोल शिक्षाएं और असाधारण कार्य ताउम्र मधुर स्मृतियों में समाए रहते हैं। वह अपने पीछे वह अनमोल धरोहर और विरासत छोड़ जाते हैं जिसकी रिक्तता कभी पूर्ण नहीं हो पाती। वह व्यक्त रूप में इस धरा पर जरूर नहीं होते लेकिन उनकी तपस्या के शक्तिशाली प्रकम्पन्न अव्यक्त रूप में सदा जन-जन को आलोकित करते रहते हैं।
ऐसी ही महान विभूति थीं परम आदरणीया राजयोगिनी अवधेश दीदी। जिनका होना ही लाखों ब्रह्मा वत्सों के लिए उमंग-उत्साह और प्रेरणा था। बचपन से ही आदरणीय दीदी मां का सान्निध्य मिला। जब से बोलना सीखा दीदी को देखा और उनके दिव्य वचनों को सुना है। आपने राजयोगी महेंद्र भाईसाहब के साथ सहयोगी बनकर भोपाल जोन में ब्रह्माकुमारीज़ की नींव रखी। शुरुआती दौर में आपका लंबा समय ग्वालियर में भी बीता। बाद में फिर आप भोपाल ज़ोन की नींव रखी और निदेशिका बनी। (जिसके अंतर्गत म.प्र. और उ.प्र. के 300 से भी अधिक केंद्र आते है) आपके कुशल मार्गदर्शन, प्रेरणा, सेवा के प्रति लगन और उमंग-उत्साह का परिणाम है कि आज जोन में 500 से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित रूप से ईश्वरीय सेवा में तन-मन-धन से जुटी हैं। 300 से अधिक सेवाकेंद्र आपके कुशल मार्गदर्शन में संचालित हैं। एक लाख से अधिक भाई-बहनें संयम के पथ पर चलते हुए जीवन के आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जीजान से जुटे हैं।
आपका विशाल-विराट हृदय, ममतामयी पालना ब्रह्मा वत्सों के दिलों में सदा जीवंत रहेगी। सेवा में नवीनता की बात हो या एक दिन में सैकड़ों कार्यक्रमों का रिकार्ड हो, इसमें भोपाल जोन सबसे आगे रहा। सेवा ही साधना है… का नारा देते हुए आपने अपने जीवन में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए। ऐसी हम सबकी प्यारी दीदी मां अव्यक्त वतनवासी बनकर आज शिव बाबा की गोद में चली गईं।

विनम्र भावपूर्ण श्रद्धांजली….💐
सादर नमन🙏
