ब्रह्माकुमारीज़ मोहना केंद्र पर दो दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर एवं भजन संध्या का हुआ शुभारंभ

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विद्यालय मोहना केंद्र पर दो दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर का हुआ शुभारंभ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक एवं प्रेरक वक्ता बीके प्रहलाद भाई शामिल हुए। साथ ही भजन प्रस्तुति के लिए अखिलेश एवं निलक्ष्य, बीके पवनउ पस्थित थे।
शुभारंभ में ब्रह्माकुमारीज़ मोहना केंद्र की प्रभारी बीके ज्योति बहन ने कार्यक्रम में पधारे वक्ता एवं श्रद्धालुओं का स्वागत अभिनंदन किया।
ततपश्चात बीके प्रहलाद भाई ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन श्रेष्ठ जीवन है। और इस जीवन का सही आनंद वही ले सकता है। जिसके जीवन में दिव्यगुण हों, क्योकि दिव्यगुण ही मानव के जीवन जा श्रंगार है। आज गुणों के अभाव ने मनुष्य छोटी छोटी बातों में दुखी हो जाता है। जीवन है तो उतार चढ़ाव तो आएंगे लेकिन उनसे कभी घबराना नहीं चाहिए। समय परिवर्तनशील है एक जैसा समय नहीं रहता। आज यदि आपके जीवन में कुछ अच्छा नहीं है तो कल अच्छा भी हो जाएगा। बस हमें यह ध्यान रखना है कि मेरी वजह से कोई दुखी न हो परेशान न हो जब आप दूसरों के हितों की चिन्ता करते है तो आपका हित स्वतः हो जाता है। जीवन मे यदि मधुरता, सन्तुष्टता, सहनशीलता, करुणा ,दया, क्षमा, प्रेम ,स्नेह, सहयोग जैसे गुण आ जाएं तो जीवन सुंदर हो जाए। इसके लिए दो बातों का जीवन मे ध्यान रखो एक तो आंख खुलते ही परमपिता परमात्मा को याद करो और दूसरा रात को सोने से पहले दिन भर किये कर्मो का हिसाब ईश्वर को बताओं कोई भूल हुई हो तो क्षमा मांग लो। और ईश्वर का शुक्रिया अदा करके उन सभी का शुक्रिया करो जिन्होंने आज के दिन को अच्छा बनाने में आपको मदद की। तो निश्चित ही जीवन में दिव्यगुणो कई खुशबू बिखरने लगेगी।
बीके प्रहलाद भाई ने स्वयं का वास्तविक परिचय कराते हुए आत्म अवलोकन कराया और राजयोग ध्यान के बारे में बताते हुए सभी को ध्यान का अभ्यास भी कराया।
कार्यक्रम में श्री गोपाल तिवारी (कॉपरेटिव बैंक डाइरेक्टर एवं पूर्व सरपंच), श्री सतेंद्र धाकड़ (मंडल अध्यक्ष भाजपा), श्री परमानंद मिश्रा (समाज सेवी), प्रकाश साहू, लखन धाकड़, गुप्ता जी, हर्ष तिवारी, हेमंत धाकड़, देवकीनंदन चतुर्वेदी, भीम तिवारी, ममता भदौरिया, चंदन धाकड़, ममता शर्मा, कमल भदौरिया, बारेलाल शर्मा, वालाराम शर्मा सहित अनेकानेक श्रद्धालु भाई एवं माताएं बहनें उपस्थित थीं।
कार्यक्रम के अंत में गोपाल तिवारी ने अपना अनुभव सुनाते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज को एक सकारात्मक दिशा देते है। ऐसे कार्यक्रम होते रहना चाहिए जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिलता रहे।

