आध्यात्मिकता जीवन को संतुलित और सफल बनाती है : अभिनेता विजय विश्वा

आध्यात्मिक परिपक्वता से बढ़ता है आत्मविश्वास और मनोबल : बीके चन्द्रिका दीदी

स्व-परिवर्तन से ही संभव है विश्व परिवर्तन : बीके प्रभा दीदी

“डिवाइन यूथ फोरम” के तहत “आध्यात्मिक परिपक्वता की परिभाषा” विषय पर कार्यक्रम आयोजित

आबूराज, राजस्थान | प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के युवा प्रभाग (आर ई आर एफ) द्वारा आयोजित “डिवाइन यूथ फोरम – आध्यात्मिक परिपक्वता” कार्यक्रम का शुभारंभ आज ज्ञानसरोवर – अकादमी में आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वातावरण में हुआ। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से 400 से भी अधिक युवा भाई एवं बहनें सहभागी बने।

कार्यक्रम का शुभारंभ तीन मिनट के सामूहिक राजयोग मेडिटेशन से हुआ। साथ ही कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन के साथ मधुरवाणी ग्रुप द्वारा प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात बीके रानीबहन एवं बीके मीतूबहन द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया गया। स्वागत भाषण में बीके आत्मप्रकाश भाई, वाइस चेयरपर्सन, यूथ विंग ने युवाओं के जीवन में आध्यात्मिक परिपक्वता के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी का अभिनन्दन किया।

यूथ विंग की चेयरपर्सन राज्ययोगिनी बीके चन्द्रिका दीदी ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि आज के समय में युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा, आत्मविश्वास एवं आध्यात्मिक मूल्यों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को आत्मचिंतन, मेडिटेशन एवं श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। दीदी ने आगे कहा कि आध्यात्मिक परिपक्वता व्यक्ति को सत्य और असत्य के बीच विवेक करने की शक्ति प्रदान करती है। इससे आत्मविश्वास और मनोबल मजबूत होता है तथा व्यक्ति जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है। जब हम दूसरों की प्रतिभाओं को सम्मान और प्रेरणा की दृष्टि से देखते हैं, तब व्यक्तित्व का विकास होता है। लेकिन जैसे ही प्रतिस्पर्धा और तुलना का भाव बढ़ने लगता है, व्यक्ति अपने मूल स्वभाव और श्रेष्ठ व्यक्तित्व से नीचे उतरने लगता है। दीदी ने जीवन में प्रेम, नम्रता, धैर्य, मधुरता और मुस्कराहट को धारण करने पर बल देते हुए कहा कि हमारी दृष्टि में प्रेम और वाणी में मधुरता होनी चाहिए। यही गुण संबंधों को मजबूत बनाते हैं और समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आप में विशिष्ट है। इसलिए स्वयं की विशेषताओं को पहचानते हुए सदैव जागरूक और सकारात्मक रहना आवश्यक है। सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ संकल्प ही जीवन को सफल और संतुलित बनाते हैं। दीदी ने कहा कि मन के संकल्प परिस्थितियों और समय के अनुरूप संतुलित होने चाहिए। जीवन में ऐसा कोई भी कार्य न करें जिससे किसी को दुःख पहुँचे, बल्कि हमारी प्रत्येक गतिविधि दूसरों के कल्याण और समाजहित के लिए प्रेरणादायक बने।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित तमिल फिल्म अभिनेता एवं सोशल एक्टिविस्ट विजय विश्वा ने युवाओं को संस्कारित एवं मूल्यनिष्ठ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता व्यक्ति के जीवन में संतुलन, शांति और सफलता लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि यहाँ आकर उन्हें अत्यंत आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। उपस्थित लोगों के मुस्कराते चेहरे, सादगीपूर्ण सफेद परिधान और आत्मीय व्यवहार ने एक अलग ही आध्यात्मिक वातावरण का एहसास कराया। विजय विश्वा ने अपने संबोधन में कहा कि फिल्म जगत में कलाकार कैमरे के सामने सकारात्मक भूमिका निभाते हैं, जबकि यहाँ लोग अपने वास्तविक जीवन में बिना किसी स्वार्थ के श्रेष्ठ मूल्यों और आदर्शों को अपनाकर प्रेरणादायी जीवन जी रहे हैं। उन्होंने इसे सच्चे अर्थों में “हीरो जीवन” बताया। उन्होंने कहा कि यहाँ आकर पहली बार “ओम शांति” शब्द का गहन भाव अनुभव करने का अवसर मिला। यह संस्था जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर विश्व बंधुत्व, भाईचारे और एकता का संदेश दे रही है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी ने सभी प्रतिभागियों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए युवाओं को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि युवा जीवन सदैव ऊर्जा, उत्साह और संभावनाओं से भरपूर होता है। यदि युवा अपने जीवन में आध्यात्मिकता को शामिल कर लें, तो उनका व्यक्तित्व और अधिक प्रभावशाली एवं मूल्यवान बन जाता है। दीदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सोने में रत्न जुड़ जाने से उसकी कीमत और बढ़ जाती है, उसी प्रकार आध्यात्मिक गुणों से युक्त युवा समाज में विशेष पहचान और सम्मान प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग केवल बातें सुनना पसंद नहीं करते, बल्कि व्यक्ति के जीवन में दिखाई देने वाले सकारात्मक परिवर्तन को अधिक महत्व देते हैं। इसलिए सबसे पहले स्वयं के जीवन को श्रेष्ठ और आदर्श बनाना आवश्यक है। दीदी ने आगे कहा कि स्व-परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन संभव है। जब तक व्यक्ति अपने जीवन में श्रेष्ठ संस्कार, दिव्य गुण और सकारात्मक सोच विकसित नहीं करता, तब तक वह दूसरों को प्रेरित नहीं कर सकता। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को सद्गुणों, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से सुसज्जित बनाएं, ताकि समाज और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में भीनमाल से आई बीके गीताबहन एवं समूह द्वारा प्रस्तुत नाटिका ने सभी को भावविभोर कर दिया।
वहीं यूथ विंग की राष्ट्रीय समन्वयक बीके कृति दीदी ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं आगामी सत्रों की जानकारी देते हुए बताया कि यह फोरम युवाओं में आत्मिक जागरूकता, नेतृत्व क्षमता एवं सकारात्मक सोच विकसित करने हेतु आयोजित किया गया है।

कुमारी तेजस्विनी द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य ने कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया।
मंच का कुशल संचालन बीके जीतू भाई द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागिओं को ईश्वरीय सौगात भेंट की गई।

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