ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में भारतीय नववर्ष, नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि, विक्रम संवत 2083 के अवसर पर स्नेह मिलन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में श्रद्धालुयों ने भाग लिया कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, आईएमए ग्वा. की पूर्व सेक्रेटरी और प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ स्नेह लता दुबे, वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई उपस्थित थे।
कार्यक्रम में केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष नवसंवत्सर की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत कि सनातन संस्कृति समृद्ध संस्कृति है। हिन्दू नव वर्ष हमें हमारी भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। वर्ष परिवर्तन के साथ साथ हमें अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को शुद्ध करना है। हर क्षण एक नया अवसर है। अतीत को पकड़कर रखने से हम आगे नहीं बढ़ सकते। जब हम अपने भीतर नई सोच, नए विचार, प्रेम, स्नेह शांति और संतुलन को स्थान देते हैं तो हमारे जीवन में खुशियां आतीं है और हम आगे बढ़ते है। आज का यह पवित्र दिन हम सभी को नई ऊर्जा, शक्ति और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में सीपीआर अवेयरनेस ट्रैनिंग के तहत डॉ स्नेह लता दुबे ने कहा कि अचानक हृदय गति रुकने से होने वाली मौतों को सीपीआर द्वारा रोका जा सकता है। कार्डियक अरेस्ट का पता चलते ही 10 सेकंड के भीतर सीपीआर शुरू कर देना चाहिए। छाती के बीच में हाथ की हथेली से लगातार 2 मिनट तक 200 से 240 बार, 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई तक दबाव देना चाहिए। इसके बाद 5 से 10 सेकंड के अंतराल के बाद फिर से 2 मिनट तक दबाव देना चाहिए। यह प्रक्रिया तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक एम्बुलेंस या डॉक्टर के रूप में सहायता न पहुँच जाए। अचानक हृदय गति रुकने के लगभग 85 प्रतिशत मामले घरों या सार्वजनिक स्थलों पर होते हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत व्यक्तियों की मृत्यु समय पर सीपीआर न मिलने के कारण हो जाती है। इसलिए सीपीआर सीखना और सिखाना सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ब्रह्मकुमारीज, IMA तथा GOGS के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का कुशल संचालन बीके प्रहलाद भाई ने करते हुए कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ की उपासना और आराधना के साथ साथ अपने अंदर की कमियों को छोड़ने और अच्छाइयों को धारण करने का संकल्प भी लेना चाहिए। तो वह अवश्य ही पूरा होता है। उन्होंने आगे कहा कि आज जो यहाँ सीपीआर से संबंधित प्रशिक्षण मिला उसका निश्चित ही सभी को लाभ मिलेगा इसके लिए डॉ स्नेहलता दुबे का आभार भी व्यक्त किया।
स्नेहमिलन कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने एक दूसरे को नववर्ष और नवरात्रि की बधाई और शुभकामनायें दीं।



