3 एम पी गर्ल्स बटालियन में चल रहे राष्ट्रीय स्तर के रॉक क्लाइंबिंग ट्रेनिंग कैम्प में हुआ मोटिवेशनल सत्र का आयोजन

नुशासन जीवन की वह नींव है, जिस पर सफलता की पूरी इमारत टिकी होती है – बीके प्रहलाद भाई

क्रोध से घट जाती है कार्य क्षमता

ग्वालियर। 3 एम पी गर्ल्स बटालियन ग्वालियर में चल रहे राष्ट्रीय स्तर के रॉक क्लाइंबिंग ट्रेनिंग कैम्प, जो कि कर्नल पुष्विन्दर कौर एवं कैप्टन बलराज सिंह की कमांड में 12 दिन के लिए 27 अक्टूबर से 7 नवंबर तक आयोजित किया गया है।
जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के 273 एन सी सी (गर्ल्स) कैडेटस ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इसीके अंतर्गत आज एक “सकारात्मक सोच और मेडिटेशन का जीवन मे महत्व” विषय पर मोटिवेशनल सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्व विद्यालय से मोटिवेशनल स्पीकर एवं राजयोग ध्यान विशेषज्ञ बीके प्रहलाद भाई उपस्थित थे। इस कैम्प के दौरान एनसीसी कैडेट को रॉक क्लाइंबिंग के साथ साथ फिजिकल ट्रेनिंग अनुशासन भी सिखाया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बी के प्रहलाद भाई ने कहा कि विचार बीज की तरह हैं। हम जैसा सोचते है वैसा ही बन जाते है। इसलिए हमेशा अपने मन में अच्छे और सकारात्मक विचार ही लेकर आना चाहिए। आशा, प्रेम, विश्वास और कृतज्ञता के विचार मन में लेकर आते है तो यह बीज ही भविष्य के सुंदर फल बन जाते हैं। सकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता, बल्कि कठिन समय में भी मुस्कुराकर आगे बढ़ना सीख जाता है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में अनुशासन बहुत आवश्यक है। अनुशासन जीवन की वह नींव है, जिस पर सफलता की पूरी इमारत टिकी होती है। बिना अनुशासन के जीवन एक दिशा-विहीन नाव की तरह होता है, जो बहाव में तो चलती है पर मंज़िल तक नहीं पहुँचती। अनुशासन हमें समय का मूल्य समझाता है, संयम और सादगी का पाठ पढ़ाता है और हमारे चरित्र को मजबूत बनाता है। अनुशासन का अर्थ केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि स्वयं को नियंत्रण में रखना भी है। यह हमारी इच्छाओं को सही दिशा देता है और हमारे कार्यों में स्थिरता लाता है। जैसे नदी अपने किनारों के कारण ही बहाव बनाए रखती है, वैसे ही अनुशासन जीवन को संतुलित और सुंदर बनाए रखता है।
साथ ही विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि क्रोध हमारे जीवन का हिस्सा नहीं होना चाहिए। क्योंकि क्रोध मन की ऊर्जा को नष्ट कर देता है साथ ही हमारी कार्य क्षमता भी घटा देता है। जहाँ प्रेम से बात की जा सकती है, वहाँ क्रोध न केवल कार्य बिगाड़ देता है, बल्कि मनुष्य की आत्मशक्ति को भी कमजोर कर देता है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तो उसकी सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है, जिससे उसके चारों ओर असंतुलन और दुःख का वातावरण बन जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो क्रोध आत्मा की सबसे बड़ी कमजोरी है। यह वह ज्वाला है जो हमारी शांति, प्रेम और शक्ति को भस्म कर देती है। जब कोई व्यक्ति क्रोधित होता है, तो वह अपने असली स्वरूप – शांति, प्रेम, खुशी, आंनद और दयालुता आदि को भूल जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि समस्याएँ कभी स्थायी नहीं होतीं, पर हमारी सोच उन्हें बड़ा या छोटा बना देती है। जब हमारा दृष्टिकोण बदलता है, तो हमारी पूरी दुनिया बदल जाती है। जब हमारा मन इधर-उधर भटकता है या एकाग्र नहीं हो पाते तो पढ़ाई में ध्यान लगाना कठिन हो जाता है। लेकिन जैसे ही हमारे विचार सकारात्मक हो जाते हैं, मन शांत और एकाग्र होने लगता है।
जब हम खुद से कहते हैं – “मैं कर सकता हूँ, मैं समझ सकता हूँ”, तब हमारे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आत्मविश्वास ही हमें आगे बढ़ने की ताकत देता है।
इसलिए सभी विद्यार्थियों को कहना चाहूंगा कि हमेशा अपने मन में अच्छे विचार रखो, खुद पर भरोसा रखो और हर दिन मुस्कराकर पढ़ाई करो या कोई भी कार्य करो। तो सफलता निश्चित है।
कार्यक्रम में सभी को राजयोग ध्यान के बारे में बताया तथा अंत मे सभी को ध्यान की गहन अनुभूति भी कराई।

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